- Two Sidharth Malhotras In Vvaan? The Actor’s Contrasting Avatars Spark A Bigger Mystery
- Sidharth Malhotra Enters Vvaan, But What Happens To Him Inside The Forbidden Forest?
- Anjana Sukhani Voices Concern Amid the Tragedy of Nepal Flash Floods
- Raksha Bandhan Special: Bollywood Sibling Pairs That Give Major Family Goals
- Vedang Raina-Alia Bhatt to Arjun Rampal-Deepika Padukone: 5 Iconic On-screen Pairings that Exude True Rakshabandhan Feels
भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति से ही 2047 तक भारत विश्व गुरू बनेगा
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के नए डिजाइन संस्थान का उच्च शिक्षा मंत्री ने किया शुभारंभ
एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा तैयार सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अनुसंधान और कंसल्टेंसी प्रयोगशाआ लोकार्पित
इंदौर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधार बनाया गया है, जो भारत की वास्तविक पहचान है। भारतीय ज्ञान परंपरा में भारत के स्व की पहचान है, जिस पर हम सभी को गर्व होना चाहिये। भारत केंद्रित शिक्षा नीति से ही 2047 तक भारत विश्व गुरू होगा। राष्ट्र का पुनःनिर्माण केवल शिक्षा से ही संभव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ही स्कूली शिक्षा में भी बच्चों के कंधों से बस्तों का बोझ कम किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ काॅलेजों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफल बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षकों की है।
यह विचार उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुषी मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने व्यक्त किये। आप शनिवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डिजाइन संस्थान के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। श्री परमार ने कहा, शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिये हर स्तर पर प्रयास होना चाहिये। कहीं से तो प्रयास आरंभ करना ही होगा, तो क्यों न हम ही अपने स्तर पर पहला कदम उठाये। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के हर स्तर पर सुधार किये जा रहे है। कोर्स डिजाइन करने, प्रवेश परीक्षा को सरल करने, समय पर परीक्षा कराने, रिजल्ट जारी करने जैसे कई काम इसमें शामिल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधार बनाया गया है। पूरे सिलेबस में ही भारतीय ज्ञान परंपरा का दर्शन होते हैं । भारत के विज्ञान से लेकर ज्ञान तक का समावेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किया गया है। भारत केंद्रित शिक्षा नीति होना जरूरी है। हमारा यह दुर्भाग्य रहा है कि भारत के ही कुछ लोग हमारी भाषा, हमारे लोगों, यहां तक की सेना, वैज्ञानिकों पर ही सवाल खड़े कर देते है, जबकि हमें इन पर गर्व होना चाहिये। श्री परमार ने कहा, 2047 तक भारत को विश्वगुरू बनाना है, जो शिक्षा नीति पूरी तरह भारत केंद्रित होना चाहिये। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है। शिक्षा में हर स्तर पर सुधार किये जा रहे है। स्कूली शिक्षा में भी बच्चों के बस्तों का बोझ नर्सरी में कम किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ पहली कक्षा से होमवर्क नहीं दिए जाने के प्रावधान किये गये है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मजबूती से लागू करने के लिये शिक्षकों की भर्ती लगातार की जा रही है। हर दिशा में प्रयास किये जा रहे है।
आईईटी एलुमनाई एसोसिएशन द्वारा तैयार की गई सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अनुसंधान और कंसल्टेंसी प्रयोगशाला की प्रशंसा करते हुए श्री परमार ने कहा, जन्म से लेकर शिक्षा ग्रहण करने तक व्यक्ति पर कई कर्ज चढ़ जाते है। आईईटी एलुमनाई द्वारा प्रयोगशाला को लेकर जो पहल की गई है, वह अपने आप में आदर्श कदम है। हर व्यक्ति में अपने कर्ज को चुकाने का भाव होना चाहिये। यहां भी शिक्षकों की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने विद्यार्थियों में कर्ज चुकाने का भाव पैदा कर सके। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधाक श्री मधु वर्मा ने कहा, शिक्षा मंत्री के रूप में श्री इंदरसिंह परमारजी ने शिक्षा को नई दिशा दी है। देश को एक गौरवशाली शिक्षा नीति की आवश्यकता थी थी, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने पूरा किया है। श्री वर्मा ने कहा, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पास 300 एकड़ से अधिक जमीन है, जिस पर एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिये। आने वाले समय में विश्वविद्यालय का विकास होगा, जिसके लिये मास्टर प्लान जरूरी है।
डिजाइनिंग के क्षेत्र में आने वाले समय में लाखों नौकरियां
अध्यक्षता कर रहे कुलगुरू डाॅ. राकश सिंघई ने कहा, विश्वविद्यालय अपने आप में एक शक्तिशाली इकाई है और इसका गौरवशाली इतिहास भी रहा है। जरूरत नवाचार करने की है, जिस पर हम लगातार काम कर रहे है। डिजाइन संस्थान के आरंभ होने पर श्री सिंघई ने कहा कि इस विभाग के साथ भारतीयता जुड़ी हुयी है। नटराज की मूर्ति की डिजाइन ही हमारी भारतीयता का प्रतीक है। डिजाइनिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिस पर काम किया जाना चाहिये। डिजाइनिंग के क्षेत्र में आने वाले समय में असीम संभावनाएं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक डिजाइनिंग के क्षेत्र में ही 60 लाख से अधिक नौकरियां होगी। शोध पर जोर देते हुए श्री सिंघई ने कहा कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को शोध के लिये 23 करोड़ रुपए जल्द ही मिलने वाला है, जो अपने आप में एक उपलब्धि है। आने वाले दिनों में शोध की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। डिजाइनिंग विभाग अपने आप संभावनाओं वाला विभाग है। आने वाले दिनों में फैशन टेक्नालाॅजी, डेरी टेक्नालाॅजी, आर्किटेक्चर टेक्नालाॅजी जैसे कोर्स भी विश्वविद्यालय आरंभ करने जा रहा है। एजुमिनाई एसोसिएशन की पहल पर श्री सिंघई ने कहा, जीवन बनाने वाली संस्था को लौटाना भी चाहिये। इसी कड़ी में एलुमिनाई एसोसिएशन का यह कदम सराहनीय और अनुकरणीय है।
शोध और प्लेसमेंट पर पूरा जोर हो

कार्यपरिषद सदस्य श्री एके द्विवेदी ने कहा, विश्वविद्यालय लगातार नए नवाचार कर रहा है। कुलपति डॉ सिंघई का दृष्टिकोण इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण और कारगर साबित हो रहा है। शोध और प्लेसमेंट पर ज्यादा जोर दिया जाना चाहिये। आयुष मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय में शोध केंद्र की स्थापना की जा रही है। इस अवसर पर एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रीतिश महाजन और क्षितिज गोयनका का उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा अभिनंदन किया गया। आरंभ में मां अहिल्या के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलन अतिथियों द्वारा किया गया। अतिथियों ने पौधरोपण करने के साथ ही आईईटी एलुमिनाई एसोसिएशन के सहयोग से तैयार की गई सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अनुसंधान और कंसल्टेंसी प्रयोगशाला का लोकार्पण किया।
कार्यपरिषद सदस्य श्रीमती मोनिका गौड़, श्री ओम शर्मा, श्री अनंत पवार विषश रूप से मंच पर उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत कुलगुरू श्री राकेश सिघंई, रजिस्ट्रार श्री प्रज्वल खरे, आईईटी निदेशक डा. प्रतोष बंसल,सुशी रचना ठाकुर,श्री विष्णु मिश्रा, श्री अनुराग द्विवेदी, डाॅ. लक्ष्मण शिंदे, डाॅ. पीयूष केंदूलकर, डाॅ. सुरेश पाटीदार, डाॅ. सखाराम मुजाल्दा, कर्मचारी नेता चेनसिंग यादव, रमेश कुशवाह ने किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह परीक्षा नियंत्रक श्री अशेष तिवारी, श्री रवि सिंघल, श्री अजय वर्मा, श्री शशिप्रकाश, श्री गेंदालाल प्रजापति, श्री नागेंद्र सोनी, श्री आशीष जैन, शिवांगी बांडे, प्रज्ञा शुक्ला ने दिये। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन डाॅ रक्षा उपाध्याय ने किया। आभार रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे ने माना।


